मधु की तलाश करती हूं.
मैं जीवन के फलसफों में विश्वास करती हूं,
रेणु बनकर धरा पर चलती हूं
मैं जीवन में जिन्दगी तलाश करती हूं,
ता-उम्र साथ चलतेदिखते है
तह में जाये तो हर कोई हरकिसी से जुदा है.
जुदाई का आलम तोड दो
जिन्दगी में मोहब्बत के रंग घोल दो
मधु की तलाश करती हूं मैं
फलसफों में विश्वास करती हूं.
Monday, February 3, 2014
मधु की तलाश.
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
सोनम वांगचुक की रिहाई
सोनम वांगचुक की रिहाई : लोकतंत्र, आंदोलन और सत्ता *समाधान बातचीत से ही * हाल ही में लद्दाख के प्रसि...
-
सोनम वांगचुक की रिहाई : लोकतंत्र, आंदोलन और सत्ता *समाधान बातचीत से ही * हाल ही में लद्दाख के प्रसि...
-
आजकल युवा पीढी में आत्म हत्या के बहुत मामले इन दिनों देखने सुनने को मिल रहे हैं।प्रत्यूषा बनर्जी के अप्रत्याशित रुप से चला जाना सबके मन में ...
-
भ्रमर दोहा 22 गुरु और 4 लघु वर्ण भूले भी भूलूँ नहीं, अम्मा की वो बात। दीवाली देती हमें, मस्ती की सौगात।। 22 2 22 12 22 2 2 21 222 22...
No comments:
Post a Comment